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मेरे ख्वाहिशों को पंख लग गए
मेरे ख्वाहिशों को पंख लग गए मन उड़ रहा है खुशियों के अंबर में गोते लगा रहा हूं तुम्हारे वादों में सदैव बहते रहना चाहता हूं इरादों की रसधार में
बातों बातों में तुम्हारे दिल के हर राज खुल गए तुम्हारे भावनाओ से रूबरू होकर मन में खुशियों की महफिल सजने लगी है
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