इंसाफ कर दो जो तुम्हें अपनी जान से ज्यादा चाहता है उसे धोखा देना क्या उचित होगा हम चाहते हैं मेरे जिंदगी में आकर मुझे यूं ही बार-बार बर्बाद करो कम से कम इसी बहाने मुलाकात होगी मेरे जैसा दोस्त कभी नहीं पाओगे मेरे एहसान की कीमत चुका नहीं पाओगे तुमसे मेरी दोस्ती अनमोल है जिसमें कोई स्वार्थ नहीं है अभी तुम्हारे करीब हूं इसीलिए मेरे प्यार की तुम कद्र नहीं करते जिस दिन दूर चली जाऊंगी उस दिन तुम्हें मेरे प्यार की कीमत पता चल जाएगी
Hindi shayari Sangrah